स्पंदन (online)
ब्लॉग संस्करण – अंक-2
6 जनवरी 2013
+++++++++++++++++++++++++
कहानी - विजयपाल सिंह भदौरिया
++++++++++++++++++++++++
आत्मसंतुष्टि
विदेश
से आये दंपत्ति एक शहर में पहुंचे. घूमते-फिरते उन्होंने एक दूकान पर लकड़ी की एक
अदभुत
कलाकृति देखी. दोनों उस कलाकृति को बहुत देर तक देखते रहे. कुछ देर बाद उन्होंने
दुकानदार से पूछा, कि इतनी सुन्दर लकड़ी
की यह मूर्ति
किसने बनाई है?
दूकानदार सहज भाव से बोला कि पास ही एक गाँव है, जहाँ बिहारी नाम का बढ़ई रहता है, वह बहुत सुन्दर
मूर्तियाँ बनाता
है और जब उसका मन होता है तो वह महीने-दो महीने में उन मूर्तियों को बाज़ार में लेकर आ जाता है. इस बार
वह अचानक मेरी दूकान पर आ गया. मैंने उससे इस काष्ठ की मूर्ति को खरीद लिया.
बहुत अच्छा कलाकार है,लेकिन यदा-कदा ही
वह बाज़ार आता है.
विदेशी
दंपत्ति उस कलाकार से मिलना चाहते थे और उन्होंने कुछ जानकारी जुटा बिहारी के गाँव की ओर रुख किया. गाँव बहुत दूर
नहीं था और उन्हें पहुँचने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा. हिन्दुस्तान के आम
गांवों की तरह यह भी एक छोटा सा गाँव था. मिट्टी के घर और उन पर फूस के छप्पर, पूछने पर उन्हें
बिहारी के घर का पता चल गया. बिहारी के घर के बाहर छप्पर नहीं था बल्कि नीम का एक
बड़ा छायादार पेड़ था. बिहारी उसी नीम के पेड़ के नीचे गहरी नींद में सो रहा था. गाँव
के छोटे बच्चों ने बिहारी को आवाज देकर जगा दिया.
अजनबी
विदेशियों को देख कर उसे आश्चर्य हुआ, लेकिन मुँह से कुछ न बोला. वो विदेशी दम्म्पत्ति थोडा ठिठके और फिर वहीं छाया में बैठ गए.
बिहारी पास के कुएं से ठंडा पानी लाया. उन्होंने पानी पिया. बिहारी चुप था क्योंकि
उसके पास कहने के लिए कुछ भी तो न था. वो ठहरा एक ठेठ देहाती, आखिर बिना
प्रयोजन के क्या बात करता.
बाहर
फैले औजारों और मूर्तियों को देख कर विदेशी पर्यटक ने बिहारी से सवाल किया,
क्या इन मूर्तियों को तुम बनाता है?
बिहारी ने हाँ का संकेत देते हुए अपना सर हिला दिया. उन्होंने दुकान
से खरीदी मूर्ति निकाल कर बिहारी को दिखाई और पूछा, इसको
भी तुमने
बनाया है?
अब बाहरी बोला, हाँ एक महीने पहले ही
मैंने इस मूर्ति को बनाया था. पर्यटक बोला कि तुम कितना बड़ा
कलाकार हो. तुम्हारा
मूर्ति तो बहुत सुन्दर होता है और ये तो सोने के भाव बिक सकता है. तुम शहर जाकर क्यों नहीं
रहता है. हम वहां तुम्हारा
इंतजाम कर देगा. तुम
वहां पर अपना मूर्ति को बना सकता है.
बिहारी
बोला,
इससे क्या हो जायेगा?
उन्होंने
समझाया कि
तुम वहां पर
मूर्तियाँ बनाएगा तो तुम्हारा
मूर्ति का अच्छा पैसा मिलेगा.
बिहारी
ने फिर कहा इससे क्या हो जायेगा?
उन्होंने
कहा,
इससे तुम्हारे पास बहुत पैसा होगा,
तुम्हारा मकान होगा,
बहुत सुविधाएँ होंगी.
बिहारी
ने फिर कहा, इससे क्या हो जायेगा?
तुम खुश रहोगे,
और फिर चैन की नींद सोयेगा. विदेशी
दंपत्ति ने समझाया.
बिहारी
ने कहा,
इतना सब करने के बाद मैं चैन की नींद सो सकूँगा, तो क्या इस समय मैं चैन की नींद नहीं सो रहा था?
अब विदेशी पर्यटक
शांत थे.
++++++++++++++++++
उरई (जालौन)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें